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अमेरिका की वजह से ईरान के 4.8 बिलियन डॉलर की पेमेंट फंसी, ओमान की खाड़ी बंद होने से कमाई ठप

 Written By: Sunil Chaurasia
 Published : May 02, 2026 02:15 pm IST,  Updated : May 02, 2026 02:15 pm IST

मौजूदा परिस्थितियों की वजह से नए टैंकर ईरानी तेल लोड करने में असमर्थ हैं और जमीन पर मौजूद ईरान की भंडारण सुविधाएं भी अपनी क्षमता की सीमा तक पहुंच चुकी हैं।

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31 टैंकरों में मौजूद है $4.8 बिलियन का माल Image Source : HTTPS://X.COM/CENTCOM

ओमान की खाड़ी में अमेरिका की सैन्य नाकेबंदी के कारण ईरान को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ईरान की तेल से होने वाली कमाई थम गई है। पेंटागन ने ये अनुमान लगाया है, जिसे Axios ने रिपोर्ट किया है। ईरान को ऐसे समय में ये भारी नुकसान हो रहा है जब अमेरिका, तेहरान पर लगातार आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है ताकि युद्ध को खत्म करने के लिए मजबूर किया जा सके। पेंटागन के अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी रक्षा विभाग ने अनुमान लगाया है कि 13 अप्रैल को ओमान की खाड़ी में नाकेबंदी शुरू होने के बाद से ईरान को तेल से होने वाली लगभग 4.8 बिलियन डॉलर की पेमेंट नहीं मिल पाई है। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि 53 मिलियन बैरल ईरानी कच्चा तेल ले जा रहे 31 टैंकर फंसे हुए हैं और अपना माल पहुंचाने में असमर्थ हैं।

31 टैंकरों में मौजूद है $4.8 बिलियन का माल

अमेरिकी अधिकारी इस स्थिति को ईरान पर "अभूतपूर्व आर्थिक दबाव" बता रहे हैं। ये स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब दोनों देशों के बीच शांति वार्ता अलग-अलग वजहों से लगातार रुकती आ रही है। पेंटागन के अधिकारियों ने बताया कि जब से अमेरिका ने ये नाकेबंदी लागू की है, अमेरिकी सेना ने 40 से ज्यादा ऐसे जहाजों का रास्ता बदल दिया है जो तेल और अन्य प्रतिबंधित सामान लेकर वहां से गुजरने की कोशिश कर रहे थे। ओमान की खाड़ी में इस समय फंसे हुए 31 टैंकरों में मौजूद माल की कीमत कम से कम $4.8 बिलियन है। इनमें से दो जहाजो को अमेरिकी सेना ने पूरी तरह से जब्त कर लिया है।

क्षमता की सीमा तक पहुंच चुकी हैं  ईरान की भंडारण सुविधाएं

मौजूदा परिस्थितियों की वजह से नए टैंकर ईरानी तेल लोड करने में असमर्थ हैं और जमीन पर मौजूद ईरान की भंडारण सुविधाएं भी अपनी क्षमता की सीमा तक पहुंच चुकी हैं। ऐसे में ईरान को अपने पुराने जहाजों को फ्लोटिंग स्टोरेज यूनिट्स के रूप में इस्तेमाल करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। ये घटनाक्रम इस बात का भी संकेत है कि नाकेबंदी अब जमीनी स्तर पर अपना असर दिखाना शुरू कर चुकी है। अधिकारियों ने बताया कि कुछ टैंकरों ने चीन तक तेल पहुंचाने के लिए पहले ही लंबे और ज्यादा महंगे वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।

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